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Sunday, May 06, 2007

एक ख़्वाब

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निगाहों को रोक लिया था
धड़कनें भी समझ गयी थी
दिल का वो समंदर चुप-चाप था
वो नामुम्किन ख़्वाब सो चुका था

अचानक कहीँ पर कुछ हुआ
और एक ऊंची सी लहर उठी
वो हसीं मुस्कान याद आ गयी
आज फिर तुमसे प्यार हो गया

मेरे होश को कह दो
आज मुझे सोने दे
आज बख्श दे क्योंकि
आज फिर तुमसे प्यार हुआ है

इन पलों को समेट लेने दो
इस एहसास को जी लेने दो
काश लब्ज़ जुबां पे आ पाते
काश ये ख़्वाब सच होता

माना ये ख़्वाब मुमकिन नहीं
पर इक ज़र्रा भी गम नहीं
ख़्वाब ही सही, तुमसे प्यार तो है
और मुझे इस ख़्वाब से प्यार है
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